वो नई दोस्ती!

Wo Nayi Dosti Prateek Saraf
रोते हुए इंसान को मुस्कान दे गयी...
मरने से बचा के जीवन दान दे गयी...
खिल खिल रही है मेरे चेहरे पे जो हँसी आज कल...
इस मुस्कराहट को वो नई दोस्त पहचान दे गयी...!

मिले नहीं अभी तक हम जिनसे...
जानती नहीं वो बात कर रही है किनसे...
फिर भी गर भरोसा है इतना उनको...
तोड़ेंगे  नहीं कह देना उनको...!

उस  दिन ना जाने हमें भी क्या हो गया था...
वो थी दुखी और हममे भी एक कवी आ गया था...
कभी ना कह पाए और ना ही समझाया हमने कभी...
उसने कुछ कहा, हमने निकाल दी मान कि बात सभी...!



Rote hue insaan ko muskaan de gai....
Marne se bacha k jeevan daan de gai...
Khil khila rahi h mere chehre pe jo hasi aaj kal...
Is muskurahat ko wo nayi dost pehchaan de gai..!

Mile nahi abhi tak hum ginse...
Janti nhi wo baat kar rhi hai kinse...
Fir bhi gar bharosa hai itna ginko...
Todenge nahi kabhi keh dena unko...!

Us din na jaane hume bhi ho kya gaya tha...
Wo thi dukhi aur hm me bhi kavi aa gaya tha...
Kabhi naa keh paaye or naa ksi ko smjhaya humne kabhi...
Usne kuch kaha hmne nikal di man ki baat sabhi...!



~Prateek Saraf

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