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यादें क्यूँ याद आती हैं?


यादें क्यूँ याद आती हैं?




यादें क्यूँ याद आती हैं,
साथ बिताये लम्हों की कसक आती जाती है,
तेरे पास न होने की कसक आती जाती है,
अकेला हूँ-तनहा हूँ, सोच ये मेरी आती जाती है,
पर याद तेरी जा के फिर क्यूँ चली आती है|

याद आता है मेरा वो तुझको यूँ पलट के देखना,
आते देख तुझको पलकें नीची कर लेना,
घंटों तुमसे बात करने को नए बहाने ढूँढना,
तेरी एक झलक पाने को घंटों गली के मोड़ पे खड़े रहना,
फिर भी तेरा मुझको न देखना,

नहीं हो पास मेरे तुम तो कोई गम नहीं,
तुम्हारे होने का एहसास तो है,
ख़्वाबों की मेरी दुनिया में, तू मेरे पास तो है,
पा लूँगा तुझे एक दिन, दिल को आज भी आस है,
ऊपर वाले की रहमतों पे मेरा आज भी विश्वास है,

तभी शायद यादें याद आती हैं,और जा के फिर चली आती हैं..............

~Baibhav

माँ

Mother & Child 
खिड़की पे जो बारिश की बूंदें टपटपा रही हैं,
ना जाने क्यूँ आज मेरे माँ की याद दिला रही हैं,
आखें बंद कर के देखना चाह रहा हूँ एक चेहरा,
बस माँ ही मेरी उसमें दिख जा रही हैं|

लौट आया है जैसे बचपन आज मेरा,
ज़िन्दगी में मेरे दिख रहा है एक नया सवेरा,
खट्टी-मीठी उन सुनहरी यादों में माँ मेरी दिख जा रही हैं,
ख़्वाबों में मेरे वो बूंदें बन गिर जा रही हैं|

घनघोर बारिश की वो रात थी,
बादलों का शोर दिल में कर रहा था अंधियारा,
डर से काँप रहा था मैं,
हिल रहा था बदन मेरा सारा|

रात भर सोयी नहीं थी माँ,
बस जब मैंने डर से उनके आँचल में मुँह छुपा लिया था,
सुकून जो मिला था मुझे उस दिन,
फिर उसकी तलाश में भटकता रहा जीवन सारा|

आज जीवन की उलझनें दूर ले आई है मुझे तुमसे,
फिर भी हर पल दुआ निकलती है तुम्हारे लिए उस रब से,
आज फिर परेशानियों के भंवर में हूँ फँसा,
तो याद आई है तुम्हारी पहले सबसे| 

ना जाने क्यूँ आज मैं फिर उस पल को जीना चाहता हूँ,
आँचल में तेरे सुकून के दो पल बिताना चाहता हूँ,
तभी याद आता है मेरा तुमसे दूर होना,
पर तुम्हारे आशीर्वाद में उठे हाथ को आज भी महसूस करता हूँ| 

आज जो कुछ भी हूँ माँ मैं, सब तेरी वजह से है,
साँस ले रहा हूँ मई, तो वो तेरी वजह से है,
दुआ करता हूँ उस ऊपर वाले से,की जो ज़िन्दगी मेरी आज तेरे संगहै,
खुशनसीब होऊंगा मैं अगर कल भी तेरा-मेरा संग है|


~Baibhav
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